वहीं क्रिकेट और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता किसी से छिपा नहीं था. 80 और 90 के दशक में मैच फिक्सिंग से लेकर खिलाड़ियों से संपर्क तक में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का नाम कई बार सामने आया। कहा जाता है कि शारजाह जैसी जगहों पर उसका प्रभाव इतना था कि बड़े-बड़े लोग भी उससे दूर नहीं रह पाते थे. हालाँकि, भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नाम ऐसा भी है, जिसने दाऊद के डर और पैसे के लालच को कोई महत्व नहीं दिया – वह नाम है कपिल देव।
जब शारजाह के मैदान पर बदला माहौल
यह घटना 1986 की है, जब संयुक्त अरब अमीरात में भारत, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच त्रिकोणीय सीरीज खेली जा रही थी. भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल मैच खेला जाना था और मैच से एक दिन पहले भारतीय टीम प्रैक्टिस के बाद लॉकर रूम में मौजूद थी. इसी बीच मशहूर एक्टर और कॉमेडियन महमूद कुछ लोगों के साथ वहां पहुंच गए. खिलाड़ियों को बताया गया कि वह एक बड़ा बिजनेसमैन है, लेकिन असल में वह शख्स दाऊद इब्राहिम था.
कार का लालच और मूक खिलाड़ी.
लॉकर रूम में बातचीत के दौरान दाऊद ने खिलाड़ियों के सामने एक अजीब प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि अगर भारत फाइनल में पाकिस्तान को हरा देता है तो टीम के सभी खिलाड़ियों को टोयोटा कोरोला कार दी जाएगी. उस समय विदेशी कार खरीदना एक बड़ी समस्या मानी जाती थी। ये प्रस्ताव सुनकर सभी खिलाड़ी हैरान रह गए, किसी ने कुछ नहीं कहा.
तभी कैप्टन अंदर आये
इसी बीच टीम इंडिया के कप्तान कपिल देव प्रेस कॉन्फ्रेंस से लौटकर लॉकर रूम में पहुंच गए. बाहरी लोगों को अंदर देखकर उनका मूड तुरंत बदल गया। कपिल देव अनुशासन के मामले में हमेशा सख्त रहे हैं और उन्हें ड्रेसिंग रूम में बाहरी हस्तक्षेप बिल्कुल भी पसंद नहीं था. उन्होंने सबसे पहले महमूद से विनम्र लेकिन स्पष्ट शब्दों के साथ सामने आने को कहा। इसके बाद कपिल देव ने उस शख्स की तरफ इशारा किया, जिसे वह पहचानते भी नहीं थे और सख्त लहजे में कहा, “कौन है? अभी बाहर आओ।”
दाऊद की खामोश वापसी
कपिल देव की आवाज में इतना आत्मविश्वास और गुस्सा था कि दाऊद इब्राहिम बिना कुछ कहे वहां से चले गए. बाद में खिलाड़ियों ने कपिल को बताया कि जिस शख्स को उन्होंने फटकार लगाई और बाहर निकाला वह कोई आम आदमी नहीं बल्कि खुद दाऊद इब्राहिम था. ये सुनने के बाद भी कपिल देव के चेहरे पर कोई अफसोस या डर नहीं था.