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- खेल में सिर्फ रणनीति ही नहीं बल्कि सही बॉडी लैंग्वेज भी जरूरी है
दी न्यू यौर्क टाइम्स6 मिनट पहले
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जानकारों का मानना है कि जब कोई दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है.
खेल के मैदान में आमतौर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन, उनके आंकड़ों और रणनीतियों पर चर्चा होती है, लेकिन एक पहलू ऐसा भी है जो बिना कुछ कहे मैच का रुख बदल सकता है और वह है खिलाड़ी की ‘बॉडी लैंग्वेज’। यह कोई किताबी या मनोवैज्ञानिक रहस्य नहीं है, लेकिन दबाव के क्षणों में यह जीत और हार के बीच बड़ा अंतर हो सकता है।
हाल ही में एनबीए के दिग्गज खिलाड़ी केविन डुरैंट की बॉडी लैंग्वेज चर्चा का विषय रही। एक गेम के दौरान, जब उनके युवा साथियों ने कुछ ख़राब पास दिए, तो ड्यूरेंट ने अपने हाथ हवा में उठाये और अपने कंधे झुकाये। जानकारों का मानना है कि जब कोई दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है. वे स्वाभाविक खेल खेलने के बजाय डर जाते हैं. जब कोई खिलाड़ी मैदान पर किसी गलती के बाद शारीरिक रूप से सिकुड़ जाता है या अपना सिर झुका लेता है, तो वह न केवल अपनी निराशा व्यक्त कर रहा है, बल्कि वह उस निराशा को अपने ऊपर और भी अधिक हावी होने दे रहा है।
इसके विपरीत जो खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना जानते हैं वे दबाव में भी टीम को बिखरने नहीं देते। डेमियन लिलार्ड जैसे दिग्गज युवा खिलाड़ियों को सलाह देते हैं कि यदि वे कोई पास या शॉट चूक जाते हैं, तो अपनी प्रतिक्रिया न्यूनतम रखें और तुरंत अगले कदम पर ध्यान केंद्रित करें। इसी तरह, WNBA की महान सू बर्ड अपने शांत स्वभाव के लिए जानी जाती थीं। चाहे टीम बड़े अंतर से आगे हो या पीछे, उनकी बॉडी लैंग्वेज हमेशा एक जैसी होती थी, जो पूरी टीम को एकजुट रखती थी।
सबसे अच्छी बात यह है कि बॉडी लैंग्वेज कोई जन्मजात आदत नहीं है जिसे बदला नहीं जा सकता। यह एक व्यायाम है. गलती होने पर गहरी सांस लेना, अपने कंधे सीधे रखना और तुरंत अपने साथियों की ओर मुड़ना – ये छोटे-छोटे बदलाव किसी भी खिलाड़ी को दबाव के क्षणों में मजबूत बनाते हैं।
ख़राब बॉडी लैंग्वेज तीन स्तरों पर नुकसान पहुंचाती है
ख़राब बॉडी लैंग्वेज का नुकसान तीन स्तरों पर होता है। सबसे पहले तो इससे खिलाड़ी का आत्मविश्वास कम हो जाता है, जिससे गलती की संभावना बढ़ जाती है। दूसरा: टीम के साथियों को निराश करता है, खासकर यदि वह टीम लीडर हो। तीसरा: यह विरोधी टीम को स्पष्ट संकेत देता है कि आप मानसिक रूप से टूट रहे हैं, जिससे विरोधियों का आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है।
