क्रिकेट इतिहास में कुछ पारियां ऐसी होती हैं जो न सिर्फ रिकॉर्ड बनाती हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल भी बन जाती हैं। ऐसी ही एक पारी ब्रायन लारा ने 30 साल पहले खेली थी, जब उन्होंने अकेले 501 रन बनाकर पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया था. ये वो पारियां थीं जिन्होंने बल्लेबाजी की सीमाओं को फिर से परिभाषित किया।
डरहम के खिलाफ खेली ऐतिहासिक पारी
साल 1994 में इंग्लैंड में एक काउंटी क्रिकेट मैच खेला जा रहा था. डरहम और वारविकशायर के बीच मुकाबला था. डरहम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 556 रन बनाकर पारी घोषित कर दी. जॉन मॉरिस ने दोहरा शतक लगाया और 204 रन की पारी खेली. हालांकि, इसके बावजूद किसी ने नहीं सोचा था कि वॉरविकशायर का कोई बल्लेबाज जवाब में इतिहास रच देगा. जब ब्रायन लारा तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए तो टीम का स्कोर सिर्फ 8 रन था. हालात मुश्किल थे, लेकिन लारा ने अपनी बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल दिया.
इसके बाद जो हुआ वह क्रिकेट के सुनहरे अध्यायों में दर्ज हो गया. लारा ने खिलाड़ियों को चलने नहीं दिया. उन्होंने संयम, तकनीक और आक्रामकता का ऐसा मिश्रण दिखाया कि मैदान पर पूरी डरहम टीम बेबस नजर आई। उन्होंने 427 गेंदों में नाबाद 501 रन बनाए, जिसमें 62 चौके और 10 छक्के शामिल थे. खास बात ये थी कि लारा अकेले ही पूरी डरहम टीम से ज्यादा हद तक पहुंच गए थे. यह आंकड़ा ही यह जानने के लिए काफी है कि यह किस स्तर की प्रविष्टियां थीं।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए अट्टू का रिकॉर्ड
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह पहला मौका था जब किसी बल्लेबाज ने 500 रन का आंकड़ा पार किया। इससे पहले पाकिस्तानी हनीफ मोहम्मद का 499 रन का स्कोर सबसे ज्यादा माना जाता था. उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए लारा ने खुद को एक अलग ही लीग में खड़ा कर दिया. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनकी पारी सबसे महत्वपूर्ण रहती है।
सचिन तेंदुलकर से तुलना
ब्रायन लारा को हमेशा सचिन तेंदुलकर का समकालीन और प्रतिद्वंद्वी माना जाता था. जहां सचिन अपनी निरंतरता और लंबे करियर के लिए जाने जाते हैं, वहीं लारा अपनी असाधारण बड़ी पारियों के लिए जाने जाते हैं। लारा टेस्ट क्रिकेट में 400 रन बनाने वाले दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज भी हैं। 2004 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई वो पारियां भी आज तक बाधित नहीं हुई हैं.