हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले भारतीय ओलंपिक हॉकी पदक विजेता सुमित कुमार और राजस्थान की रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी सोनिका तांडी ने गुपचुप तरीके से शादी कर ली है। दोनों एक-दूसरे को करीब आठ साल से जानते थे। परिवार की आपसी सहमति से दोनों ने उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित द ऑर्किड ऋषिवन रिजॉर्ट में सात फेरे लिए। इस शादी में कुछ खास बातें थीं. पहला ये कि ये शादी पूरी तरह से बिना दहेज के मनाई गई. सगाई में सुमित को केवल 1 रुपया मिला। दूसरे, दुल्हन पक्ष के स्वागत के दौरान रिबन काटने और जूते छुपाने की रस्म निभाई गई। इन रस्मों में सुमित ने अपनी भाभियों को करीब डेढ़ लाख रुपये दिए. तीसरा, शादी के अगले दिन, सुमित हरियाणा से दिल्ली और फिर बेंगलुरु पहुंचे, जहां उन्होंने 7 से 12 फरवरी तक मैदान में अभ्यास किया। बाद में, 12 फरवरी की रात को वह हॉकी लीग की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए, जहां फरवरी के आखिरी सप्ताह में अभ्यास खेल खेले जाएंगे। इस समारोह में कुल लगभग 70 लोग शामिल हुए, जिनमें लड़के पक्ष से 25 और लड़की पक्ष से 45 सदस्य मौजूद थे. शादी की खबर सुनकर खेल जगत में हैरानी और खुशी का माहौल है. सहकर्मियों और परिवार ने दोनों को जीवन के इस नए चरण की शुरुआत पर बधाई दी है। सुमित-सोनिका की दोस्ती, प्यार और शादी की कहानी… 6 फरवरी को अलविदा, 7 फरवरी को मैदान पर वापसी। 5 फरवरी को फेरों के बाद 6 फरवरी की दोपहर विदाई समारोह हुआ। भाइयों ने पारंपरिक तरीके से अलविदा कहा। सुमित दुल्हन सोनिका के साथ ऋषिकेश से सोनीपत अपने घर पहुंचे, जहां पारंपरिक गृह प्रवेश समारोह आयोजित किया गया था। सुमित की फ्लाइट 7 फरवरी को सुबह 3:00 बजे थी. वह दिल्ली से बेंगलुरु आए और 7 से 12 फरवरी तक मैदान पर अभ्यास किया। बाद में, 12 फरवरी की रात को वह हॉकी फ्री लीग की तैयारी के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए, जहां फरवरी के आखिरी सप्ताह में अभ्यास मैच खेले जाएंगे। उधर, सोनिका दिल्ली में अपने काम से जुड़ गई है. बिना दहेज की शादी सामाजिक संदेश देती है। इस शादी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सुमित के परिवार ने किसी भी तरह का दान-दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया. यह पहले से ही साफ था कि शादी बिना दहेज के मनाई जाएगी. एक साधारण और गरीब परिवार से आने के बावजूद सुमित ने समाज को सकारात्मक संदेश दिया और दहेज प्रथा के खिलाफ एक मिसाल कायम की. समारोह में सुमित के पिता प्रताप सिंह, भाई जय सिंह और उनका परिवार, भाई अमित और अन्य सदस्य मौजूद थे। सोनिका के माता-पिता, भाई और रिश्तेदार भी शामिल हुए. पारंपरिक रीति-रिवाजों को लेकर माहौल उत्साहपूर्ण रहा। ओलंपिक पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी कौन है, हम 5 पॉइंट्स में जानेंगे… सुमित कुमार सोनीपत जिले के कुराड गांव के रहने वाले हैं, उनका समर्थन उनके माता-पिता और भाई-बहन करते हैं। उनका जन्म 20 दिसंबर 1996 को हुआ था। कामकाजी पिता प्रताप सिंह और मां दर्शना देवी के बेटे सुमित को बचपन में आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था। पारिवारिक स्थिति सामान्य नहीं थी, लेकिन उनके माता-पिता और बड़े भाइयों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। बड़े भाई जय सिंह और अमित ने खुद दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करके परिवार की जिम्मेदारी उठाई, ताकि सुमित खेल पर ध्यान केंद्रित कर सके। उन्होंने 8 साल की उम्र में पहली बार हॉकी स्टिक पकड़ी थी। महज आठ साल की उम्र में अमित अपने बड़े भाई सुमित के साथ गांव के एचके हायर सेकेंडरी स्कूल हॉकी अकादमी में दाखिल हुए। यहीं उन्होंने पहली बार हॉकी स्टिक थामी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. शुरुआती दौर में वह मैदान पर घंटों अकेले प्रैक्टिस करते थे और अपने खेल को बेहतर बनाने में लगे रहते थे. एक समय ऐसा भी था जब सुमित के पास हॉकी जूते खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे। जरूरत पड़ने पर उन्होंने खुद भी दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया। अपनी मां की मौत के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और उनकी याद में उनकी फोटो वाला लॉकेट लेकर मैदान में उतरते रहे. कठिन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया। उन्होंने कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया और कोच नरेश के मार्गदर्शन में उनके खेल में तेजी से सुधार हुआ। स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद गुरुग्राम छात्रावास में ट्रायल हुआ, जहां उनका चयन हो गया। उन्होंने वहां लगभग तीन वर्षों तक प्रशिक्षण लिया। बाद में, उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) उत्तर क्षेत्रीय केंद्र, बहालगढ़ में चुना गया, जहाँ से राष्ट्रीय स्तर तक उनकी राह मजबूत हुई। भारतीय हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डर सुमित कुमार आज भारतीय पुरुष हॉकी टीम के भरोसेमंद मिडफील्डर हैं। अपनी तेज़ खेल शैली, मजबूत रक्षा और उत्कृष्ट गेंद नियंत्रण के लिए जाने जाने वाले सुमित ने जूनियर स्तर से लेकर सीनियर टीम तक अपने लगातार प्रदर्शन से अपनी पहचान बनाई। वह 2016 यूथ विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थीं और 2017 सुल्तान अजलान शाह कप में सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया था। अब जानिए कौन हैं सोनिका तांडी, जो बनीं सुमित की पार्टनर… राजस्थान के छोटे से गांव गलाड़ में जन्मीं भारतीय महिला हॉकी टीम की दमदार मिडफील्डर सोनिका तांडी का जन्म 20 मार्च 1997 को राजस्थान के चुरू जिले के गलाद गांव में हुआ था। एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई कप जैसे प्रमुख टूर्नामेंटों में पदक जीतने वाली सोनिका ने अपने खेल करियर की शुरुआत ग्रामीण परिवेश से की। मेरे पिता हरियाणा पुलिस में एसआई रहे थे। बाद में, उनके पिता के काम के कारण, परिवार हरियाणा के हिसार में रहने आ गया। उनके पिता, दौलतराम तांडी, हरियाणा पुलिस के उप-निरीक्षक थे और यातायात प्रभारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। सोनिका की दो बहनें मोनिका और दीपका हैं, जबकि उनका एक छोटा भाई मोहित है। वे तीनों पढ़ रहे हैं. उनकी मां संतोष एक गृहिणी हैं। सोनिका जब 11 साल की थीं तब उन्होंने हॉकी स्टिक उठाई थी। सोनिका जब छठी कक्षा में थीं, तब उन्होंने महज 11 साल की उम्र में हॉकी स्टिक उठा ली थी। उस समय वह हिसार पुलिस पब्लिक स्कूल में पढ़ रही थीं। स्कूल टीम के लिए खेलते हुए उनकी टीम ने SAI टीम को हराया, जिससे उन्हें एक नई पहचान मिली। बाद में उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली सोनिका, जो बिना अकादमी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनीं, ने कभी निजी प्रशिक्षण नहीं लिया या अकादमी में शामिल नहीं हुईं। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के अधिकारियों की देखरेख में अभ्यास किया। उनके कोच बलराज सिंह सोढ़ी थे। लगातार मेहनत और अनुशासन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। —————– ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी ओलंपिक पहलवान ने रचाई शादी, वीडियो: बहादुरगढ़ में पिता के दोस्त की बेटी के साथ लिए 7 फेरे; झज्जर निवासी ओलंपिक पहलवान दीपक पुनिया की मंगलवार रात शादी हो गई। उन्होंने बहादुरगढ़ के हिल्टन रिजॉर्ट में अपने पिता के दोस्त की बेटी शिवानी के साथ सात फेरे लिए। इस दौरान दीपक ने क्रीम कलर की शेरवानी और शिवानी ने गहरे लाल रंग का लहंगा पहना था. दोनों ने एक ही डिजाइनर से ड्रेस बनवाई थी। (पूरी खबर पढ़ें)