हाल ही में भारत और बांग्लादेश के क्रिकेट बोर्ड के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. ये पूरा विवाद वहां से शुरू हुआ जब बीसीसीआई के निर्देश के बाद केकेआर फ्रेंचाइजी ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज कर दिया. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने तो अपने देश में आईपीएल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी है. उन्होंने यहां तक मांग कर दी है कि उनके टी20 वर्ल्ड कप के मैच श्रीलंका में कराए जाएं.
इन सबके बीच भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला वनडे मैच वडोदरा में खेला गया, जिसमें मैच ऑफिशियल्स यानी अंपायरों की लिस्ट में बांग्लादेश के शराफुद्दौला सैकत का नाम भी है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले वनडे मैच में शरफुद्दौला तीसरे अंपायर की भूमिका निभा रहे हैं.
एक तरफ बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी को पत्र लिखकर भारत में अपने खिलाड़ियों और स्टाफ की सुरक्षा पर चिंता जताई थी. तो ऐसा कैसे हुआ कि बीसीबी ने अपने रेफरी को भारत आने से नहीं रोका? क्या आप जानते हैं इस मामले पर आईसीसी का नियम क्या है?
बांग्लादेश का अंपायर भारत कैसे आया?
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में अंपायर की भूमिका निभाने वालों का आईसीसी के साथ अनुबंध होता है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद अंपायरों को दो श्रेणियों में विभाजित करती है। रेफरी को ICC एलीट पैनल और ICC इंटरनेशनल पैनल श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
इन रेफरी को ICC द्वारा नियुक्त किया जाता है और केवल ICC ही उन्हें हटा सकता है। इसलिए, बीसीसीआई, बीसीबी या किसी अन्य देश का क्रिकेट बोर्ड यह तय नहीं करता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में कौन सा देश और कौन अंपायर होगा। यह काम आईसीसी का है, इसलिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड अगर चाहता तो भी शराफुद्दौला को भारत आने से नहीं रोक सकता था.
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